10. जन्तुओं में उत्सर्जन (Excretion)

जन्तुओं में उत्सर्जन (Excretion)

The process of living beings by which they take out taboos and toxins from the body, is called Excretion.

प्राणियों की उस कार्य-विधि को जिसके द्वारा यह वर्ज्य पदार्थ तथा विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालते हैं, उत्सर्जन (Excretion)  कहते हैं।

Importance of emissions:

  1. Maintains body composition, pH value and osmotic pressure in the body.
  2. The harmful substances produced in the body are eliminated from the body by excretion.
  3. Maintains homoeostasis or permanent internal environment.
  4. Excretory maintains the required amount of substances in the body.

There are two types of taboos.

  1. Organic taboos: It is mainly CO2. Carbon dioxide is acidic in nature. If it remains in the cells, it is fatal for the cells due to formation of excessive acid. It is formed under the respiratory system and that is why it is taken out of the body through the respiratory system.
  2. Nitrogenous taboos: It contains nitrogen. Ammonia is the main among them. Ammonia or other nitrogenous taboos related to it are manufactured and removed by the excretory system.

उत्सर्जन का महत्वः

  1. शरीर में शरीर के द्रव्यों की संरचना, पीएच मान तथा परासरणी दाब बनाए रखता है।
  2. उत्सर्जन द्वारा शरीर में उत्पन्न हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
  3. समस्थैतिक(Homoeostasis) या स्थायी आन्तरिक वातावरण बनाए रखता है।
  4. उत्सर्जी पदार्थों की आवश्यक मात्रा को शरीर में बनाए रखता है।

दो प्रकार के वर्ज्य पदार्थ होते हैं

  1. कार्बनिक वर्ज्य पदार्थ : यह मुख्य रूप से CO2 है। कार्बन डाईऑक्साइड की प्रकृति अम्लीय होती है। यह अगर कोशिकाओं में रह जाए तो अत्यधिक अम्ल के निर्माण के कारण कोशिकाओं के लिए घातक होती है। यह श्वसन क्रिया के अन्तर्गत बनती है और इसीलिए इसको शरीर के बाहर निकालने की क्रिया श्वसन तन्त्रा द्वारा होती है।
  2. नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थ : इसमें नाइट्रोजन होती है। इनमें अमोनिया मुख्य है। अमोनिया या इससे सम्बन्धित अन्य नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थों का निर्माण एवं निष्कासन उत्सर्जन तन्त्रा के द्वारा होता है।

    Kidney & Nephron
    Kidney & Nephron

Kidney: The kidneys are the main organ of excretion. Humans, rabbits and high quality breasts without kidney. Can not survive The kidneys act to excrete all nitrogen excretory substances from the body.

Skin:      Skin also acts as an excretory organ. It contains sweat glands which expel water, urea, and other salts from the blood to the outer surface of the skin.

Lungs:   Carbon dioxide is expelled from the lungs.

Intestine:   The innermost layer of the intestines is made up of epithelial cells. These cells emit some salts. These salts come out of the body with feces.

Liver: Liver is helpful in expelling nitrogenous substances.

वृक्क (Kidney): वृक्क उत्सर्जन के मुख्य अंग होते हैं। वृक्क के बिना मनुष्य, खरगोश तथा उच्च कोटि के स्तनी. जीवित नहीं रह सकते। वृक्क शरीर से सभी नाइट्रोजन उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करते हैं।

त्वचा(Skin): त्वचा भी एक उत्सर्जन अंग का कार्य करती है। इसके अन्दर स्वेद ग्रन्थियां होती हैं जो रुधिर से पानी, यूरिया, तथा अन्य लवण त्वचा की बाहरी सतह पर निष्कासित कर देती है।

फुफ्फुस(Lungs): फुफ्फुस से कार्बन डाई-ऑक्साइड निष्कासित होती है।

आंत Intestine): आंतों की सबसे अन्दर की परत एपीथीलियमी कोशिकाओं की बनी होती है। ये कोशिकाएं कुछ लवणों का उत्सर्जन करती है। ये लवण मल के साथ शरीर के बाहर निकल जाते हैं।

यकृत(Liver): यकृत नाइट्रोजनी पदार्थों को निष्कासित करने में सहायक होता है।

Different animals are classified into three categories based on excretory substances.

  1. Ammoniotelic: Ammonia is the main excretory substance in these animals. Examples – some fish, some crustaceans and some protozoa.
  2. Uricotelic: The excretory substance in these animals is uric acid. Examples- All reptiles and birds.
  3. Ureotelic: Urea is the main excretory substance in these animals. Examples- frogs, mammals, etc.

उत्सर्जी पदार्थों के आधार पर विभिन्न जन्तुओं का वर्गीकरण तीन श्रेणियों में किया जाता है।

  1. अमोनोटिलिकः इन जन्तुओं में मुख्य उत्सर्जी पदार्थ अमोनिया होती है। उदाहरण- कुछ मछलियां, कुछ क्रेस्टेशियन तथा कुछ प्रोटोजोआ।
  2. यूरिकोटेलिकः इन जन्तुओं में उत्सर्जी पदार्थ यूरिक अम्ल होता है। उदाहरण- सभी सरीसृप तथा पक्षी।
  3. यूरीओटेलिकः इन जन्तुओं में मुख्य उत्सर्जी पदार्थ यूरिया होता है। उदाहरण- मेंढ़क, स्तनधारी, इत्यादि।
उत्सर्जन अंग Excretory organ उत्सर्जी पदार्थ Excretory material


उपशिष्ट गैस, कार्बन डाईऑक्साइड तथा जल

Residual gas, carbon dioxide and water

त्वचा (स्वेद ग्रन्थियां)

Skin (sweat glands)

जल, लवण, नाइट्रोजन युक्त अवशिष्ट पदार्थ

Residual materials containing water, salts, nitrogen



जल, नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थ, घुलनशील लवण, औषधियां, विष इत्यादि।

Water, nitrogenous wastes, soluble salts, drugs, poisons etc.

Excretory Organs of Man

The kidney is the main organ of human excretory organs. Both men and women are located on both sides of the vertebral sac in the abdominal cavity. Each human kidney bean seed is 10 cm. Long and 5 cm. Is wide.

  • The left kidney is located slightly ahead of the right kidney. There is a round more adrenal gland at the base of the kidney.
  • Only one renal artery is healed and one renal vein or renal vein returns to blood. The ureter from the middle of its inner floor opens and opens into the bladder. The bladder opens downward through the genital bladder through a muscular bladder.
  • Each human kidney has two parts – Medulla and Cortex.
  • The cortex consists of approximately ten million Nephrons. Each Nephrons is made up of Bowman’s capsule and glomerulus.
  • All renal tubules are to open in a central pit called pelvis. The pelvis remains attached to the bladder tube.
  • In the male, both the bladder and the sperm pass through the urethra but these mantles and vaginal passages are different
  • The renal tubules act as filtration as the blood enters the Bowman capsule by the wide afferent arteriole and then exits it by the narrow subluxation, hence the pressure of the blood increases in the glomerulus, which consequently filters all the contents of the blood.

मनुष्य के उत्सर्जन अंग (Excretory Organs of Man)

मनुष्य के उत्सर्जन अंगों में वृक्क मुख्य है। पुरुषों तथा स्त्रियों दोनों में ही ये उदर गुहा में कशेरुका दंड के दोनों ओर स्थित रहते हैं। प्रत्येक मानव वृक्क सेम के बीज जैसा 10 से.मी. लम्बा तथा 5 सेमी. चौड़ा होता है।

  • बायां वृक्क दाहिने वृक्क से कुछ आगे स्थित है। वृक्क के आधार तल पर आगे की ओर एक गोल अधिक वृक्क ग्रन्थि (adrenal gland) होती है।
  • केवल एक रीनल धमनी द्वारा रुधिर जाता है तथा एक ही रीनल शिरा या वृक्क शिरा द्वारा रुधिर वापस आता है। इसके भीतरी तल के मध्य से मूत्रावाहिनी निकलकर मूत्राशय में खुलती है। मूत्राशय नीचे की ओर एक पेशीय मूत्रा नाल द्वारा जनन मूत्रा छिद्र द्वारा बाहर खुलता है।
  • प्रत्येक मानव वृक्क के दो भाग होते हैं- मेडयूला(Medulla) तथा कार्ट्रेक्स(Cortex)
  • कॉर्टेक्स में लगभग एक करोड़ Nephrons होते हैं। प्रत्येक Nephrons बोमेन्स कैप्सूल तथा ग्लोमेरूलस का बना होता है।
  • सभी वृक्क नलिकाएं एक केन्द्रीय गृहा में खुलनी है जिसे पेल्विस (Pelvis) कहते हैं। पेल्विस मूत्रा नली से जुड़ी रहती है।
  • पुरुष में मूत्रा तथा शुक्राणु दोनों ही मूत्रा-नाल(Urethera) द्वारा बाहर जाते हैं किन्तु ये मंत्रा नाल तथा योनि मार्ग अलग-अलग होते हैं।
  • वृक्क नलिकाएं छनने का कार्य करती है क्योंकि रुधिर चौड़ी अभिवाही धमनिका द्वारा बोमेन्स कैप्सूल में जाता है और फिर संकरी अधमनिका द्वारा उससे बाहर निकलता है अतः रुधिर का दबाव ग्लोमेरूसस में बढ़ जाता है जिसके पफलस्वरूप रुधिर में घुले सभी पदार्थ छन जाते हैं।

Emission mechanism defects

Kidney Failure: In the kidney affected by this defect, the urine is not formed. There may be many reasons such as excess blood pressure, infection by bacteria (injury), or the effect of a toxin. If only one kidney becomes useless, then the work of the person keeps on doing well only with the other kidney.

Stone: In the pelvis of the kidney, crystals of mineral salts (calcium oxalate), form in the form of a body, obstructing the path of the bladder.

उत्सर्जन तंत्रा के दोष

गुर्दा निष्कार्यता (Kidney Failure): इस दोष से ग्रस्त वृक्क में मूत्रा नहीं बन पाता। ऐसे कई कारणों से हो सकता है जैसे अधिक रक्तदाब, आघात(चोट) बैक्ट्रिया द्वारा संक्रमण या किसी विषालु (टॉक्सिन) का प्रभाव। यदि केवल एक गुर्दा बेकार हो गया तो व्यक्ति का काम केवल दूसरे गुर्दे से ठीक-ठाक चलता रहता है।

पथरी (Stone): वृक्क की पेल्विस में खनिज लवण (कैल्शियम ऑक्जलेट) के क्रिस्टल, एक पिण्ड के रूप में एकत्रा हो जाते हैं जिसमें मूत्रा के रास्ते में रुकावट आती है।

By : Ramakant Verma

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