जलोढ़ मिट्टी

जलोढ़ मिट्टी उत्तरी मैदान और नदी घाटियों के विस्तृत भागों में पाई जाती हैं। ये मिट्टी देश के कुल क्षेत्रफल के लगभग 40 प्रतिशत भाग को ढके हुए हैं। ये निक्षेपण मिट्टी हैं जिन्हें नदियों और सरिताओं ने वाहित तथा निक्षेपित किया है। राजस्थान के एक संकीर्ण गलियारे से होती हुई ये मिट्टी गुजरात के मैदान में फैली मिलती हैं। प्रायद्वीपीय प्रदेश में ये पूर्वी तट की नदियों के डेल्टाओं और नदियों की घाटियों में पाई जाती हैं।

जलोढ़ मिट्टी गठन में बलुई दुमट से चिकनी मिट्टी की प्रकृति की पाई जाती हैं। उतम जल निकास होता हैं। सामान्यतः इनमें पोटाश, जैविक पदार्थ, सूक्ष्म पोषक तत्व की मात्रा अधिक और  फ़ॉस्फोरस की मात्रा कम पाई जाती है। गंगा के ऊपरी और मध्यवर्ती मैदान में ‘खादर’ और ‘बांगर’ नाम की दो भिन्न मिट्टी विकसित हुई हैं।

  • खादर प्रतिवर्ष बाढ़ों के द्वारा निक्षेपित होने वाला नया जलोढ़क है, जो महीन गाद होने के कारण मृदा की उर्वरता बढ़ा देता है।
  • बांगर पुराना जलोढ़क होता है जिसका जमाव बाढ़कृत मैदानों से दूर होता है।

खादर और बांगर मिट्टी में कैल्सियमी संग्रथन अर्थात् कंकड़ पाए जाते हैं। निम्न तथा मध्य गंगा के मैदान और ब्रह्मपुत्र घाटी में ये मिट्टी अधिक दुमटी और मृण्मय हैं। पश्चिम से पूर्व की ओर इनमें बालू की मात्रा घटती जाती है।

जलोढ़ मिट्टी का रंग हल्के धूसर से राख धूसर जैसा होता है। इसका रंग निक्षेपण की गहराई जलोढ़ के गठन और निर्माण में लगने वाली समयावधि पर निर्भर करता है। जलोढ़ मिट्टी पर गहन कृषि की जाती है।

By : Ramakant Verma

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